vidushak

take it seriousally

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vijay tripathi


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हथियारवालों खबरदार !!!!

Posted On: 30 Apr, 2011  
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टैक्स…..वो भी पुलिसवालों से

Posted On: 23 Apr, 2011  
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(लाठियां ) बरसाने की होली

Posted On: 16 Mar, 2011  
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सडक़ पर लोकतंत्र और लोकतांत्रिक सडक़ें

Posted On: 11 Mar, 2011  
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सडक़ पर लोकतंत्र और लोकतांत्रिक सडक़ें

Posted On: 11 Mar, 2011  
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आने से उनके आए बहार……

Posted On: 12 Feb, 2011  
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आने से उनके आए बहार……

Posted On: 12 Feb, 2011  
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महंगाई मार कमेटी

Posted On: 22 Jan, 2011  
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सूर्य जहां भी हो..हाजिर हो

Posted On: 10 Jan, 2011  
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हर जाति का विकास

Posted On: 17 Dec, 2010  
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त्रिपाठी जी ! नमस्कार ! किसी की शोध या सर्वे पढने की जरूरत मुझे तो महसूस नहीं होती | मैं अपने चरों तरफ देखता हू लोगों के पास , हर वर्ग के लोगों के पास काफी कमाई आ रही है | जो बेरोजगार हैं वो भी पैसे वालों के यहाँ या किसी भी जगह कोई न काम कर के बढिया गुजारा कर रहे हैं | स्कूल में बच्चे भर पेट खाना खा कर आते हैं | सरकारी सप्लाई से सस्ता राशन मिल रहा है | जिन्हें कहीं भी काम नहीं मिलता वो मनरेगा से महीने में कम से कम १५०० रुपये कम लेते हैं | भिखारी भी मस्ती से एक पौवा शाम को डकार लेते हैं| अगर कोई मौसमी फसल जैसे प्याज या टमाटर महंगा हो जाता है तो उसके लिए पत्रकारों को सिर्फ प्रधान मंत्री जी ही क्यों नजर आते हैं ? अगर बकने की आजादी इस देश में इतनी खुली है तो कोई अक्ल की बात भी बकी जा सकती है | जब कुछ माह पहले प्याज थोक में ५ रु० कि० और आलू तीन रु० कि० मिल रहे थे तो किसी भी पत्रकार ने प्रधान मंत्री जी को शाबाशी नही दी? क्या कुछ लोगों को उनसे जाती खुंदक है ?

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‘निर्माण कार्य का एक आध इवेंट मिल जाता तो दो चार साल माया मोह त्याग कोई खेल किए बगैर सात्विक रहकर गुजार लेते।’ काफी भेद भरी बात कही है सर। समझने वाले समझ सकते हैं। एक बेहतरीन व्यंग्य। कॉमनवेल्थ खेल अधिकारियों-नेताओं के लिए अपनी जिंदगी संवारने का ‘खेल’ ही तो बने हुए हैं। न जाने देश का सम्मान कैसे इन खेलों से बढ़ेगा, हालांकि इनके आयोजन से पहले ही देश के मान को जो चोट पहुंच रही है उसकी भरपाई जल्द संभव नहीं होगी। एक तरफ घर के भेदी लंका ढहा रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के बेस्ट खिलाड़ी यहां आने से नानुकर कर रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि देश के स्वाभिमान की किसी को परवाह नहीं है और आयोजन से जुड़े अधिकारी खुद के पोषण में जुटे हैं। मैं कई दिनों के बाद जागरण जंक्शन पर लौटा हूं, आज आपकी फोटो और लेख देखा तो अच्छा लगा।

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